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राजस्थान के करौली जिले का डांग क्षेत्र अपने पिछड़ेपन के लिए ही जाना जाता है। अरावली की छोटी-छोटी घाटियों ने यहाँ डाकुओं को छिपने के लिए एक सुरक्षित ठिकाना उपलब्ध कराया है। यह पूरा इलाका सड़क, बिजली, स्कूल या चिकित्सा सुविधाएं जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। इलाके का मुख्य पेशा कृषि है। यह क्षेत्र भी पानी की अत्यंत कमी से ग्रस्त है। राजीव गांधी संस्थापन द्वारा इस इलाके को बचाने के लिए आने से पहले इस क्षेत्र में बारिश के पानी या अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का कोई प्रयास नहीं हुआ था। राजीव गांधी संस्थापन ने इस क्षेत्र के विभिन्न गाँवों में 400 से अधिक जल-संरक्षण संरचनाओं का निर्माण किया है। संस्थापन ने ग्राम गौरव संस्थान की स्थापना में भी मदद की है जो स्थानीय निवासियों और पंचायतों की मदद से प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन में संस्थापन के कार्य को आगे ले जाएगी।

महाराजपुरा गाँव