संस्थापन के बारे में

राजीव गांधी संस्थापन (आरजीएफ) की स्थापना पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के विज़न को पूरा करने के लिए 1991 में की गई थी। उन्होंने एक ऐसे आधुनिक भारत का सपना देखा था जो धर्मनिरपेक्ष, स्वतंत्र और प्रगतिशील हो; एक ऐसा देश जो समानता के लोकतांत्रिक सिद्धांत की बुनियाद पर स्थापित हो, और विकास को इसकी समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं के साथ लेकर चलता हो। उन्होंने पूर्वाग्रह से मुक्त शिक्षित लोगों वाले एक देश की कल्पना की; जहाँ महिलाएँ बराबरी के दर्जे के साथ हर कार्य में भाग लेती हों; एक ऐसा राष्ट्र जिसके पास सभी नागरिकों, खास कर वंचितों को सशक्त बनाने के लिए अवसर और इच्छाशक्ति हो।

1991 से 2009 तक संस्थापन ने स्वास्थ्य, साक्षरता, स्वास्थ्य, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, महिला और बाल विकास, निःशक्तजनों को सहायता, पंचायती राज संस्थाओं, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, और पुस्तकालयों सहित कई व्यापक मुद्दों पर काम किया है। 2011 में संस्थापन ने आगे बढ़ते हुए प्रमुख रूप से शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया। इसके अलावा, संस्थापन ने पहले से ही चलाए जा रहे अपने प्रमुख कार्यक्रमों को जारी रखा है, जैसे- इंटरैक्ट (संघर्ष से प्रभावित बच्चों को शैक्षिक सहायता प्रदान करने का कार्यक्रम), राजीव गांधी एक्सेस टू ऑपॉर्च्यूनिटीज़ कार्यक्रम (शारीरिक रूप से निःशक्त युवाओं की गतिशीलता बढ़ाने का कार्यक्रम), राजीव गांधी कैम्ब्रिज स्कॉलरशिप प्रोग्राम (मेधावी भारतीय छात्र-छात्राओं को कैंब्रिज में पढ़ने हेतु वित्तीय सहायता), प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन (ग्राम गौरव कार्यक्रम को सहायता) और वंडरूम (बच्चों के लिए एक अभिनव पुस्तकालय को सहायता) इत्यादि।

श्रीमती सोनिया गांधी संस्थापन की अध्यक्ष हैं। अन्य न्यासीगण हैं – डॉ. मनमोहन सिंह, श्री पी. चिदंबरम, श्री मोंटेक सिंह अहलूवालिया, श्री सुमन दुबे, श्री राहुल गांधी, डॉ. शेखर राहा, प्रो एम. एस. स्वामीनाथन, डॉ. अशोक गांगुली, श्री संजीव गोयनका और श्रीमती प्रियंका गांधी वाड्रा।