वीडियो गैलरी

इंटरएक्ट छात्रवृत्ति हासिल करने वाले लाल बाज़ार, कश्मीर के ज़ोहैब बिन जवीद की कहानी। ज़ोहैब ने 1995 में एक आतंकवादी हमले में अपने पिता को खो दिया था। राजीव गांधी संस्थापन ने उन्हें अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए सहयोग दिया।

वेंकटेश भी इंटरएक्ट अध्येता है। उन्होंने बारहवीं कक्षा में 93% अंक हासिल किए। वर्तमान में वह दिल्ली विश्वविद्यालय के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स में अर्थशास्त्र (ऑनर्स) की पढ़ाई कर रहे हैं।

इंटरएक्ट छात्रवृत्ति ने 11 राज्यों के 2000 से अधिक बच्चों को अपने सपने साकार करने में सहयोग दिया है। 2016 के हमारे मणिपुर कार्यशाला में बच्चों ने कुछ इस तरह अपनी भावनाएँ व्यक्त कीं।

सुल्तानपुर के निवासी मोहम्मद हक़ीक़ खान बता रहे हैं कि किस तरह संस्थापन से मिले तिपहिया मोटर वाहन ने उन्हें इस हद तक आत्मनिर्भर बना दिया कि वह अपने गाँव में एक स्कूल तक खोलने में कामयाब रहे हैं।

रितु और सुनील दोनों ही शारीरिक रूप से निःशक्त हैं। उन्हें 2002 में वाहन मिला। वे बता रहे हैं कि किस तरह गतिशीलता बढ़ने के साथ ही उनका जीवन बदल गया।

लाल किले के पीछे लगने वाले खुले बाजार में हुए बम विस्फोट में मतीन ने अपना पैर खो दिया। 1994 में उन्हें वाहन दिया गया। यह देखने लायक है कि किस तरह उस वाहन ने उनका जीवन बदल कर रख दिया।

शबी और शबाना को राजीव गांधी संस्थापन से राजीव गांधी ऐक्सेस टूऑपर्टूनिटीज़ कार्यक्रम के अन्तर्गत मोटर चालित ट्रविहेलर मिला। इस नयी गतिशीलता के साथ उन्होंने अपने शहर मेरठ में "कोशीश कल्याणकारी समाज" का गठन किया और उसके बेनर तले शहर में विकलांगों के लिए काम कर रहे हैं। शबी और शबाना दोनों को उत्तर प्रदेश सरकार ने उनके प्रयासों के लिए सम्मानित किया है।

राजीव गांधी संस्थापन का विश्वास है कि किसी शारीरिक रूप से निःशक्त व्यक्ति की गतिशीलता बढ़ जाने से शिक्षा और रोजगार के अवसरों तक उनकी पहुँच भी बढ़ जाती है। इसी विश्वास के आधार पर प्रतिष्ठान ने 1992 में ‘राजीव गांधी एक्सेस टू ऑपॉर्च्यूनिटीज़’ (आरजीएटीओ) कार्यक्रम की शुरुआत की। इस कार्यक्रम के माध्यम से प्रतिष्ठान युवा निःशक्तजनों को विशेष रूप से डिजाइन किए गए वाहन प्रदान करता है।

मृणालिनी को वर्ष 2016 में कैम्ब्रिज से पीएचडी करने के लिए राजीव गांधी कैम्ब्रिज स्कॉलरशिप मिली। अपनी इस यात्रा के बारे में उन्होंने कुछ इस तरह बताया ।

गणित में मेघना की दिलचस्पी समय के साथ-साथ बढ़ती गई। इस वीडियो में उन्होंने बताया है कि उन्हें क्यों ऐसा लगता है कि राजीव गांधी कैम्ब्रिज स्कॉलरशिप उनके लिए एक वरदान साबित हुई है...

वंडरूम बच्चे हमें अपनी प्रतिभाओं पर गर्व करा रहे हैं। वंडरूम में एक और पंख जोड़ते हुए बच्चों ने उनके नवीनतम थीयटर प्ले पर हमें खेलना है के लिए अपने ख़ुद गाए हुए गीत रेकर्ड किए हैं। सुनिए प्यारा गीत "संग संग खेलना है" वोंडेरूम के बच्चों द्वारा ।

वंडरूम बच्चे हमें अपनी प्रतिभाओं पर गर्व करा रहे हैं। वंडरूम में एक और पंख जोड़ते हुए बच्चों ने उनके नवीनतम थीयटर प्ले पर हमें खेलना है के लिए अपने ख़ुद गाए हुए गीत रेकर्ड किए हैं। सुनिए प्यारा गीत "स्कूल टाइम" वोंडेरूम के बच्चों द्वारा ।

निराली और उसके भाई-बहन वंडरूम के नियमित सदस्य हैं। पहले उन्हें पता ही नहीं था की एक वंडरूम जैसी कोई लाइब्रेरी उनके घर की पास स्थित है परंतु अब वे कहते हैं कि वंडरम उनके जीवन का एक हिस्सा बन गया है। सुनिए उनकी कहानी।

वंडरूम की एक छात्रा नेहा वंडरूम का अपना अनुभव सुनाते हुए बता रही हैं कि कैसे यह उन्हें दूसरों से अलग बनाता है।

दीपक पिछले दो साल से वंडरूम के सदस्य हैं और इसने उनके जीवन में जो परिवर्तन लाया है वह उन्हें बहुत पसंद है।

राजीव गांधी संस्थापन की मदद से ग्राम गौरव संस्थान ने चोरजी के खेत के निकट एक पोखर बनाया। देखें कि पानी की बढ़ती उपलब्धता ने चौरजी के जीवन को कैसे बदल दिया।

ग्राम गौरव संस्थान ने 2012 में महाराजपुरा गांव में एक 'ताल' का निर्माण किया था, जब कुल 712 एकड़ जमीन बुवाई गई थी और कुछ ही समय में खेतों को ताजे फसल से भर दिया गया था। अगले साल गांव में कुल 1840 क्विंटल सरसों, 3378.80 क्विंटल गेहूं और 20 क्विंटल जौ का उत्पादन हुआ।

ग्राम गौरव संस्थान राजस्थान में डांग क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए पगारा का निर्माण कर रहा है। "पगारा" के साथ किसान इस ऊबड़ खाबड़ भूमि को कृषि योग्य भूमि में बदलने में सक्षम हैं। पगारा संरचनाओं के बारे में अधिक जानने के लिए वीडियो देखें

राजीव गांधी संस्थापन, डांग के लोगों की आजीविका में सुधार के लिए डांग क्षेत्र, राजस्थान के 114 गांवों में ग्राम गौरव संस्थान द्वारा संचालित जल संचयन और भूमि प्रबंधन संरचनाएं बनाने के काम का सहयोग कर रहा है। उनकी कहानी देखें।

राज़वेन के एजाज अहमद सोफी 2014 के कश्मीर बाढ़ के दौरान घर-घर जाकर सहायता प्रदान करने के संस्थापन के सराहनीय प्रयास के प्रति अपना आभार व्यक्त कर रहे हैं।

2014 के कश्मीर बाढ़ के दौरान संस्थापन द्वारा किए गए राहत कार्यों के बारे में बता रहे हैं तेनगान गाँव के हाजी मीर।

कौपुरा गाँव की तौहीदा बानो बता रही हैं कि 2014 के दुःखद बाढ़ के दौरान शुद्ध पानी उपलब्ध कराने और चिकित्सा शिविरों का आयोजन करने में संस्थापन ने किस प्रकार योगदान दिया था।