प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन

प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन

NRMबार-बार सूखा, पानी की कमी और घटते जा रहे भू-जल स्तर को देखते हुए राजीव गांधी संस्थापन ने नवंबर 2001 में अपना ‘नेचुरल रिसोर्स मैनेजमेंट’ (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, एनआरएम) कार्यक्रम शुरू किया। 2011 में संस्थापन ने अपने एनआरएम संबंधी कार्यों को आगे ले जाने के लिए ‘ग्राम गौरव’ को बढ़ावा दिया है और तबसे यह इसे सहायता प्रदान करता रहा है। ग्राम गौरव संस्थान राजस्थान के डांग क्षेत्र के 78 गांवों में काम कर रहा है। जल संसाधन को बढ़ाने, मृदा संरक्षण और कृषि उत्पादन को बढ़ाने के प्रयासों में स्थानीय समुदाय को सहायता प्रदान करना ही इसकी गतिविधियों के केंद्र में रहा है। 2012 के बाद से इस परियोजना ने 400 से अधिक संरचनाओं का निर्माण कर 1,760 परिवारों को लाभ पहुँचाया है। 730 हेक्टेयर से अधिक की भूमि में सिंचाई सुनिश्चित हुई है और 116 हेक्टेयर बंजर भूमि में अब दो फसलें उगाई जा रही हैं। धान, गेहूँ, सरसों, चना और बाजरा की उपज बढ़ाने के लिए भी प्रयास किए गए हैं। परियोजना क्षेत्र की करीब 900 महिलाओं को 79 स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) में संगठित किया गया है।

 

 

हमें प्रेरित करनेवाली कहानियाँ

राजस्थान के करौली जिले का डांग क्षेत्र अपने पिछड़ेपन के लिए ही जाना जाता है। अरावली की छोटी-छोटी घाटियों ने यहाँ डाकुओं को छिपने के लिए एक सुरक्षित ठिकाना उपलब्ध कराया है। यह पूरा इलाका सड़क, बिजली, स्कूल या चिकित्सा सुविधाएं जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। इलाके का मुख्य पेशा कृषि है। यह क्षेत्र भी पानी की अत्यंत कमी से ग्रस्त है।

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महाराजपुरा गाँव