टीचर एम्पावरमेंट प्रोग्राम

टीचर एम्पावरमेंट प्रोग्राम

teacher-empowerment

राजीव गांधी संस्थापन स्कूलों को सामाजिक परिवर्तन के एक स्थल के रूप देखती है। हालांकि इस परिवर्तन को साकार करने के लिए इस बदलाव की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी यानी शिक्षक को उत्प्रेरित और विकासित करना बहुत आवश्यक है। शिक्षक विकास और प्रबंधन की मौजूदा प्रणाली शिक्षकों को ज्ञान के सह-सर्जक और सुविधाकर्मी के रूप में प्रशिक्षित करने के बजाय उन्हें जानकारी के प्रदाता मात्र के रूप में प्रशिक्षित करती है। शिक्षण के प्रतिमान में बदलाव के लिए शिक्षकों की भूमिका को एक ऐसे सुविधाकर्मी के रूप पुनर्परिभाषित करना जरूरी है जो ऐसे समान अवसर और रचनात्मक वातावरण का निर्माम करते है जहाँ शिक्षण या सीखना स्वाभाविक तरीके से हो सके। इसे ध्यान में रखते हुए संस्थापन ने 2011 में ‘टीचर एम्पावरमेंट प्रोग्राम’ (शिक्षक सशक्तिकरण कार्यक्रम) की संकल्पना तैयार की।

शिक्षकों की क्षमता निर्माण और शिक्षक प्रबंधन प्रणाली को परिष्कृत करने के लिए ‘टीचर एम्पावरमेंट प्रोग्राम’ ने विश्लेषण और हस्तक्षेप की एक मजबूत और व्यापक रूपरेखा प्रदान करने का प्रयास किया। इस कार्यक्रम ने शिक्षकों को भी ऐसी शैक्षणिक पद्धतियों विकसित करने में सक्षम करने का प्रयास किया जिससे पाठ्यक्रम-आधारित शिक्षण संरचना की बजाए बच्चों में समालोचनात्मक चिंतन को प्रोत्साहन मिले। इस कार्यक्रम ने शिक्षकों के सशक्तिकरण की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्हें इस रूप में सशक्त बनाने का प्रयास किया जिससे वे जाति, समुदाय, धर्म, लिंग, सामाजिक-आर्थिक समीकरणों, क्षेत्रीय अस्मिता आदि की परवाह किए बगैर प्रत्येक बच्चे की शिक्षा के लिए एक सुविधाकर्मी की भूमिका अदा कर सकें। इस कार्यक्रम के तहत संस्थापन ने प्रारंभिक शिक्षा में डिप्लोमा (D.El.Ed.) का पाठ्यक्रम संचालित करने के लिए ‘डिस्ट्रिक्ट इन्स्टीच्यूट्स ऑफ एजुकेशन एंड ट्रेनिंग (डाइट) को भी सहायता दी। संस्थापन ने ‘नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ एजुकेशन प्लैनिंग एंड एडमिनिस्ट्रेशन’ (न्यूपा) में ‘राजीव गांधी फाउंडेशन चेयर फॉर टीचर डेवलपमेंट एंड मैनेजमेंट’ की भी स्थापना की और ‘वर्किंग कन्डीशंस ऑफ टीचर’ (शिक्षकों की कार्यदशा) का विश्लेषण करने के लिए एक राष्ट्रीय अध्ययन भी किया।