राजीव गांधी कैम्ब्रिज छात्रवृत्ति

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राजीव गांधी कैम्ब्रिज छात्रवृत्ति

राजीव गांधी संस्थापन और कैम्ब्रिज कॉमनवेल्थ ट्रस्ट, 1994 से ही युवा छात्रों को छात्रवृत्ति प्रदान करती रही है। 1994-2011 के दौरान कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में द्वितीय बी.ए. (ऑनर्स) डिग्री की पढ़ाई के लिए लगभग 60 भारतीय छात्रों को वार्षिक वित्तीय सहायता प्रदान की गई। 1996-2012 के दौरान संस्थापन ने ब्रिटेन के विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों को स्नातक और स्नातकोत्तर अध्ययन के हिस्से के रूप में भारत की यात्रा करने के लिए 139 यात्रा छात्रवृत्ति प्रदान की। 2014 और 2015 में सुश्री मेघना नाग चौधरी और सुश्री प्रीता कल्याणसुंदरम को शिक्षा विषय में एम.फिल. की पढ़ाई के लिए पूर्ण छात्रवृत्ति प्रदान की गई।

कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में सामाजिक विज्ञान में एम.ए. और पी.एच.डी. करनेवाले मेधावी भारतीय छात्रों को राजीव गांधी कैम्ब्रिज स्कॉलरशिप प्रदान करने के लिए 2016 में संस्थापन और कैम्ब्रिज ट्रस्ट ने एक सहोयगपूर्ण व्यवस्था कायम की। छात्रवृत्ति कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के किसी भी कॉलेज के लिए मान्य है। प्रत्येक छात्रवृत्ति एम.ए. के लिए एक वर्ष तक और पीएच.डी. के लिए चार वर्ष तक के लिए प्रदान की जाती है। छात्रवृत्ति के अंतर्गत विश्वविद्यालय की ट्यूशन फीस के साथ-साथ एक वार्षिक वजीफा भी प्रदान किया जाता है जो एक व्यक्ति के लिए पर्याप्त होता है। प्रत्येक छात्रवृत्ति की ठीक-ठीक राशि उम्मीदवार की वित्तीय स्थिति के आकलन के आधार पर संस्थापन और कैम्ब्रिज ट्रस्ट द्वारा संयुक्त रूप से तय किया जाता है।

2016-17 के दौरान, सुश्री गारिमा सहाय और सुश्री मृणालिनी वेंकटेश्वरन को क्रमशः समाजशास्त्र और इतिहास में पीएचडी के लिए राजीव गांधी कैंब्रिज छात्रवृत्ति से सम्मानित किया गया।

2017-18 के लिए छात्रों की चयन प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है और राजीव गांधी केम्ब्रिज छात्रवृत्ति 2017 के लिए आवेदन वर्तमान में बंद है।

पात्रता की शर्तें:

  1. अभ्यर्थी भारत का निवासी नागरिक होना चाहिए
  2. अभ्यर्थी को कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में अध्ययन करने के लिए वित्तीय सहायता की आवश्यकता होनी चाहिए
  3. अभ्यर्थी को प्रकाशित प्रक्रिया के अनुसार कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में आवेदन करना होगा और छात्रवृत्ति आवेदन की प्रकाशित समय सीमा के भीतर आवेदन करना होगा। अभ्यर्थी को कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में नामांकन की स्वीकृति मिल चुकी होनी चाहिए और उसे विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित सभी शैक्षणिक आवश्यकताओं (अंग्रेजी भाषा योग्यता सहित) को पूरा करता हुआ होना चाहिए।
  4. कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में सशर्त प्रवेश की अनुमति प्राप्त करने के बाद अभ्यर्थी को वहाँ के अलावा राजीव गांधी संस्थापन में भी अलग से आवेदन करना होगा ।

 

 

हमें प्रेरित करनेवाली कहानियाँ

शिक्षा के माध्यम से भारत के कम आय वाले समुदायों के साथ काम करने के मेरे अनुभव से मेरी यह धारणा और मजबूत हुई कि शिक्षा वास्तव में विकास की सबसे मजबूत बुनियादों में से एक है। मैं गहरे सैद्धांतिक ज्ञान और एक वैश्विक परिप्रेक्ष्य प्राप्त करके और भी बड़ी चुनौतियों का सामना करने और देश भर में कम आय वाले परिवारों की एक बड़ी आबादी को प्रभावित करने को प्रेरित हुई। मेरी इसी आकांक्षा ने मुझे कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में एजुकेशन लीडरशिप एंड स्कूल इम्प्रूवमेंट विषय में एमफिल करने की ओर प्रेरित किया। राजीव गांधी संस्थापन की छात्रवृत्ति ने मेरे इस सपने को साकार करना संभव बनाया और कैम्ब्रिज ट्रस्ट समुदाय में शामिल होने का दुर्लभ अवसर भी मुझे प्रदान किया।

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प्रीता कल्याणसुंदरम

 

शिक्षा के माध्यम से भारत के कम आय वाले समुदायों के साथ काम करने के मेरे अनुभव से मेरी यह धारणा और मजबूत हुई कि शिक्षा वास्तव में विकास की सबसे मजबूत बुनियादों में से एक है। मैं गहरे सैद्धांतिक ज्ञान और एक वैश्विक परिप्रेक्ष्य प्राप्त करके और भी बड़ी चुनौतियों का सामना करने और देश भर में कम आय वाले परिवारों की एक बड़ी आबादी को प्रभावित करने को प्रेरित हुई। मेरी इसी आकांक्षा ने मुझे कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में एजुकेशन लीडरशिप एंड स्कूल इम्प्रूवमेंट विषय में एमफिल करने की ओर प्रेरित किया। राजीव गांधी संस्थापन की छात्रवृत्ति ने मेरे इस सपने को साकार करना संभव बनाया और कैम्ब्रिज ट्रस्ट समुदाय में शामिल होने का दुर्लभ अवसर भी मुझे प्रदान किया। एक कैम्ब्रिज स्कॉलर के रूप में मुझे अलग-अलग क्षेत्रों में शोध कर रहे कई छात्रों से बातचीत करने का अवसर मिला। इन अनुभवों ने एक व्यक्ति और एक प्रोफेशनल दोनों ही रूपों में मुझमें बड़े बदलाव लाए। इससे मुझे अलग-अलग मानवीय द्वंद्वों, परिप्रेक्ष्यों और दृष्टिकोणों और को समझने में मदद मिली। इसने शिक्षा के क्षेत्र में कार्य कर रहे दुनिया भर के साथियों से और दुनिया भर में प्रचलित विभिन्न शिक्षा प्रणालियों से मेरा परिचय कराया। इसने न्यायपूर्ण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए समर्पित प्रमुख शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों और नीति-निर्माताओं से जुड़ने का अवसर भी मुझे प्रदान किया। कैम्ब्रिज में बिताए गए साल ऐसे थे जिसमें मुझे विभिन्न संस्कृतियों और व्यवस्थाओं के एक एक अद्भुत समागम में घुलने-मिलने का अवसर मिला। दुनिया के सभी कोनों से नए दोस्त बने। कई पुराने तरीकों को छोड़ने और कई नए और बेहतर प्रबुद्ध तरीके अपनाने की प्रक्रिया से भी गुजरी। वापस भारत आकर इन सभी सीखों को लागू करने में यह लंबे समय तक सहायक होगा। एमफिल पाठ्यक्रम ने मुझे स्कूली सुधार की जरूरतों और इसे संभव बनानेवाली रणनीतियों को समझने में बहुत मदद की। इस लक्ष्य के प्रति मुझे सशक्त बनाया। वर्तमान में मैं सरकारी और कम शुल्क वाले निजी स्कूलों में स्कूल नेतृत्व के साथ मिलकर भारत की स्कूल प्रणाली में सुधार लाने पर काम कर रही हूँ। जैसा कि मैरी ऐनी रैडमैशर ने क्या खूब कहा है, "दूनिया की दूसरी ओर चांद को चमकते देखकर मैं पहले जैसी नहीं रही।" मुझे यह अवसर देने के लिए मैं राजीव गांधी फाउंडेशन की हृदय से आभारी हूँ!

प्रीता कल्याणसुंदरम